
पी एम पद की जुगत ...
सारे देश में सिर्फ एक ही नेता ऐसा है जो सबके सामने खुलेआम यह कह सकता है कि वह प्रधानमंत्री बनना चाहता है ...लालू प्रसाद यादव के अतिरिक्त शायद ही कभी किसी ने यह स्वीकारोक्ति की हो कि वह पी एम के पद की दौड़ में है ...आमतौर पर सभी यह कह कर अपनी महात्वाकाँक्षा दबा जाते हैं कि आलाकमान जो भी जिम्मेदारी सौंपेगा उसे स्वीकार करेंगे...भले लोग अपनो श्रीमुख से यह बात स्वीकार न करें लेकिन यह सच है कि हर नेता उसी तरह प्रधानमंत्री बनना चाहता है जिस प्रकार से हर फिल्म देखने वाला हीरो बनने की तमन्ना पाले रहता है ....भले लोग अपनी जुबां से इस बात का इकरार न करें लेकिन यह भी सच है कि उनके हाव भाव से लोगों को उनके इरादों का अंदाजा हो जाता है ...इन दिनों कुछ ऐसा ही बर्ताव है मध्यप्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री का ...जबसे काँग्रेस के सर्वेसर्वा राहुल गाँधी ने एक आम सभा में यह कहा कि वो प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नही है इनके ख्वाबों को पर लग गए हैं ...वैसे तो राहुल गाँधी शुरु से ही यह बात दोहराते रहे हैं लेकिन इस बार उन्होने यह भी जोड़ दिया कि अभी उनकी उम्र और अनुभव इस पद के लायक नही है वैसे भी पार्टी में मनमोहन सिंह और दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद हैं ....इस बयान के बाद से दिग्विजय सिंह की राजनीति में अचानक सक्रियता बढ़ गई है ...मसला चाहे कोई भी हो वो बयान जारी कर ही दोते हैं ...दिग्गी राजा की कोशिश रहती है कि किसी तरह से अपने बयान के जरिए वो मुसीबत में पड़ी सरकार और पार्टी को भंवर से बाहर निकाल सकें...चाहे रामदेव के तीर हों या फिर अन्ना का अनशन दिग्विजय सिंह हर मौके पर बयान देने के लिए उपलब्ध नजर आए...और ते और लोदेन की मौत पर भी उनका यह बयान सामने आया कि किसी का भी अंतिम संस्कार पूरे विधि विधान से किया जाना चाहिए ...यह अलग बात है कि उनके बयानों के कारण भी पार्टी और सरकार को कई दफा नीचा देखना पड़ा लेकिन इससे दिग्गी राजा की सेहत पर कोई खास असर नही पड़ा. दिग्विजय सिंह बोलने वालों की परवाह किए बगैर अपनी राह पर बढ़ चले हैं ...राह प्रधानमंत्री की कुर्सी की ...वो जानते हैं कि बहुत कठिन है डगर पनघट की ....लेकिन कोशिश में हर्ज ही क्या है ...
अर्जुन सिंह के निधन और नारायण दत्त तिवारी के पैत्रृक विवाद में फंसे होने के बाद से दिग्गी के लिए राहे कुछ ज्यादा ही खुल गई हैं ....काँग्रेस के केन्द्र में सोनिया राहुल के बाद एक शून्य ही नजर आता है जिसे भरने के लिए दिग्गी राजा की सक्रियता देखी जा सकती है ...दिग्गी जो खुले आम यह कह चुके हों कि चुनाव विकासल के बजाए सामाजिक गणित के आधार पर जीते जाते हैं इस फन मे खासे माहिर हैं ...मध्यप्रदेश में बेहिसाब छँटनी और विकास के प्रति नकारात्मक रवैये के बावजूद वो पूरे दस साल तक प्रदेश की कमान सँभाले रहे ...दिग्गी को राजनीति की गोटिंया बिठाने में खासी महारत हासिल है जिस अनुभव और योग्यता का लाभ वो अपने इस ख्वाब के साकार करने में उठाना चाहते हैं ....पिछले दिनों नोयडा के पास हुए भूमि अधिग्रहण के विरोध में राहुल के धरने के वक्त दिग्गी राहुल के हमकदम नजर आए...राहुल के हर कदम उठाने में दिग्गी की खासी भूमिका रही...वे राहुल बाबा की परछाई की तरह नजर आ रहे थे ...राहुल का ग्लैमर और दिग्गी की राजनीति का गठजोड़ उस वक्त नजर आया जब पुलिस का अनुरोध मान कर पहले तो राहुल बाबा गाँव छोड़ने तैयार हो गए ...जब यह काफिला रास्ते में था और लग यही रहा था कि इस नाटक का पटाक्षेप जल्द ही हो जाएगा ...इस बीच उत्तरप्रदेश प्रशासन के प्रवक्ता शंशाक शेखर सामने आकर अपनी सरकार की पीठ थपथपा रहे थे इस बीच रास्ते में अचानक राहुल बाबा ने अपनी गाड़ी रुकवाई और पुलिस के अधिकारियों से अपनी गिरफ्तारी के कागज माँगने लगे ...काँग्रेस के इस अमूल बेबी को भला राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों की समझ कहाँ ....जाहिर है राहुल को यह गुरु ज्ञान सिर्फ दिग्गी राजा ही दे सकते हैं क्योंकि प्रशासन की जितनी समझ उन्हे है उतनी न राहुल को नाहि उनके आसपास की मंडली को ...मायावती को नाको चना चबा देने का यह आइडिया सिर्फ और सिर्फ दिग्विजय ही दे सकते थे ...
दिग्विजय सिंह ने अपने लिए जो गणित सोचा है वह सहज समझा जा सकता है ....दिग्विजय सिंह को मालूम है कि अगर अगले् चुनावों में काँग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलता है तो निश्चित है कि राहुल ही अगले प्रधानमंत्री बंनेगे और यदि वर्तमान सरकार की तरह साधारण बहुमत मिलता है तो फिर मनमोहनसिंह का ही नम्बर आएगा ....लेकिन अगर गणित जोड़तोड़ वाला रहा या मजबूत के बजाए मजबूर सरकार बनी तो फिर दिग्गी के भाग जाग सकते हैं ....इसके लिए वो सिर्फ इतनी कोशिश कर रहे हैं कि काँग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिले ...लेकिन बहुमत के लिए उन्हे तरसना पड़े ...इसलिए इन दिनों वो मुसलमानों को लुबाने की कोई कोशिश नही छोड़ रहे हैं चाहे वह संघ को गरियाने का मामला हो या फिर बाटला हाउस में फर्जी मुठभेड़ बताने की बात हो या फिर आंतकवाद के लिए प्रभावित गाँव में जाकर क्लीन चिट देने का मामला हो ...वे मुसलमानों को अपने साथ जोड़कर सोशल इंजीनियरिंग को अंजाम दे रहे हैं .....हिंदु आंतकवाद शब्द को प्रचारित करने में दिग्विजय सिंह का बड़ा योगदान है ...जाहिर है यह सारा जुगत आगामी चुनावों के लिए ही भिड़ाया जा रहा है ...
मध्यप्रदेश की बात करें तो यह हमेशा से काँग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है ... लेकिन दिग्विजय के कुशासन के कारण आज प्रदेश से काँग्रेस का नामोनिशान मिट गया है ...दस साल तक सत्ता से दूर रहने के बाद अब दिग्विजय ने प्रदे्श में अपनी गोटियाँ बिठा दी है ....दिग्गी ने न सिर्फ पार्टी अध्यक्ष अपनी पंसद का बनवाया है बल्कि नेता प्रतिपक्ष भी उनके ही खेमे का है ....जाहिर है अगले चुनाव में दिग्गी गुट का बोलबाला रहेगा और चुनाव नतीजे आने के बाद दिग्गी अपने् हिसाब से जोड़ घटाना मोलभाव कर सकेंगे...देखना यह है कि क्या होता है इस जोड़ घटाने का अंजाम फिलहाल तो अगले चुनाव तक तो अंगूर खट्टे हैं दिग्गी बाबा

