Monday, 9 May 2011

किसलिए चाहिए आंतकी ...


किसलिए चाहिए आंतकी ...
भारत सरकार ने पाकिस्तान पर बन रहे दबाव को भुनाने के लिए पच...्चीस आंतकवादियों को एक बार फिर भारत के हवाले करने की माँग कर दी है ...सवाल यह है कि आखिर हमें ये आंतकी किसलिए चाहिए ...क्या उन्हे भारत दर्शन कराना है जिस तरह से अबू सलेम को हम शहर दर शहर घुमा रहे हैं ...इन्क्रेडिबल इंडिया के विज्ञापन के लिए आमिर खान के बजाए अबू सलेम को बनाना चाहिए ...उसे चाहे जब नवाबों के शहर हैदराबाद से भोपाल की यात्रा पर देखा जा सकता है ...मेरे ख्याल से भारत के प्रधानमंत्री को भी इतनी तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था नही दी गई होगी जितनी इस आंतकवादी को दी गई है...न सिर्फ सिक्युरिटी बल्कि इज्जत भी दी जाती है जब भोपाल आता है यह आंतकी तो न सिर्फ पुलिस के बल्कि दूसरे जिनमें हमारे मीडिया के साथी भी शामिल हैं भाई भाई कह कर एक अदद बाइट के लिए रिरियाते नजर आते हैं ...सिर्फ अबू क्यों एक और जी हैं जो मुम्बई के आंतकी हमले में धरे गए थे ...अजमल कामिल कसाब जिसने महज बीस हजार रुपयों के लिए सैकड़ों हिंदुस्तानियों के कत्ल की बात स्वीकार की उसे आज इतनी कड़ी सुरक्षा में रखा गया है कि शायद वह मुहावरा सच हो जाता है कि पंरिदा भी उसके पास पर भी नही मार सकता ...सदी के महानायक के खिताब से नवाजे गए अमिताभ बच्चन ने कसाब के लिए अपने ब्लाग में लिखा था कि भारत में वही इकलौता शख्स है जो सबसे सुरक्षित है ...ये अलग बात है कि फिर करोड़ों हिन्दुस्तानियों के दिल की बात को आवाज देने वाला यह नायक अपनी बात से यह कहते हुए पलट गया कि उसने किसी पाठक के मैसेज को ही अपने ब्लॉग पर लिखा था ...खैर महानायक तो पलट गए लेकिन काश हमारी सरकारें इस मैसेज को समझ पाती और जान पाती कि कितना गमो गुस्से का गुबार भरा है ...लेकिन शायद लोकतंत्र में अटल जी की बात सच साबित होती कि लोकतंत्र में सिर के भीतर क्या है यह नही देखा बल्कि सिर्फ सिर गिने जाते हैं ...दरअसल सरकारों की आँखों में लगे चश्में का रंग अपने फायदे और नुकसान के हिसाब से बदलते जाते हैं ...और इसी के साथ बदलती जाती है नीतियाँ और बयान ...अब हमारे हर मुद्दे पर बयान देने के लिए प्रसिद्ध दिग्विजय सिंह को ही लें ...दुनिया के सबसे खतरनाक आंतकवादी के खात्में के दिन उन्होने बयान दिया कि लादेन की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार कायदे और धार्मिक रीतिरिवाजों के हिसाब से किया जाना था ...सवाल यह है कि इस आंतकी के मारे जाने के बाद जब सारी दुनिया जश्न मना रहा थी क्या जरुरत थी भारत के एक नेता की ओर से इस तरह के संदेश जाने की ...आखिर क्या दिखाना चाहते हैं दिग्गी राजा जबकि हमारी सरकारें अंकल सैंम की दी हुई लॉलीपॉप चूसने की आदत बना चुके हैं ...इसका असर भी हुआ और सोनिया जी ने दिग्विजय सिंह को बुलाकर कड़वी डाँट भी पिलाई लेकिन कहते हैं कि पुरानी आदत भला कहाँ इतनी आसानी से पीछा छोड़ती हैं ...कई मुहावरे इस संबध में प्रचलित हैं जो आपको याद आ गए होंगे इसलिए फिलहाल उनका उपयोग नही कर रहा ...अगले ही दिग्विजय सिंह का एक नया रुप देखने को मिला ...अपने नए बयान में उन्होने इस आंतकी को ओसामा जी कह कर सम्बोधित किया ...सवाल यह है कि सिर्फ सोनिया और राहुल गाँधी को जी सम्बोधित करने वाली काँग्रेस की संस्कृति में ओसामा के लिए यह सम्बोधन क्यों निकल रहा है ...ओसामा के आदर से अंतिम संस्कार की बात समझी भी जा सकती थी क्योंकि भारत की संस्कृति में किसी की मौत के साथ ही उसके सारे पाप धुल जाते हैं ...सारी दुश्मनी का खात्मा हो जाता है लेकिन जिसे हर कोई कोस रहा हो ...अगले ही रोज जिस आंतकवादी के विडियो गेम मार्केट में आ गई हो उसके लिए भारत का आदर सूचक जी कुछ समझ नही आया इसके अलावा दिग्गी राजा ने मुम्बई के मारे गए आंतकियों के लिए आताताई शब्द की बजाए लोग शब्द का प्रयोग किया...आखिर क्यों ये हमदर्दी ...जल्द ही बात समीक्षकों की समझ में आ गई कि उत्तरप्रदेश में हो रहे चुनावों के कारण यह अल्पसंख्यक कार्ड खेला जा रहा है ...दरअसल मध्यप्रदेश में पार्टी की करारी हार के बावजूद दिग्गी राजा को आज तक ये समझ नही आया है कि अब चुनाव सिर्फ विकास से जीते जा सकते हैं अब सिर्फ विकास कार्ड चलता है ....सवाल यह है कि किस बूते पर वे मुसलमानों को अपनी ओर आकर्शित करने का मंसूबा पाल रहे हैं...लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे दिग्गी क तब झटका लगा था जब उनका साम.जिक गणित फैल हो गया था ....इसके बाद गहरे सदमें में चले गए दिग्गी राजा ने दस साल तक राजनीति से दूर रहने की घोषणा कर दी थी लेकिन कुर्सी का लोभ जो न कराए वो कम ...जल्द ही दिग्गी राजा फिर बयानों के तीर चलाते नजर आने लगे लेकिन वो धार न रही उधर पार्टी में उनके अपने ही खाई खोद रहे थे इसलिए जल्द ही दिग्विजय सिंह नें केन्द्र की जुगत बिठाई और दिल्ली जा बैठे ..दस जनपथ से नजदीकी बनाने के लिए दिग्गी ने नया रास्ता चुन लिया है ...सीधा भगवा परिवार पर आरोप ...इस सनक की अति तो यह है कि उन्हे हर आंतकी वारदात में अब भगवा परिवार का हाथ नजर आता है ...ठीक अमेरिकन की तरह जिन्हे हर मुसलमान आंतकी नजर आता है इसके चलते महान डॉक्टर कलाम और शाहरुख खान जैसे महानुभावों को अमेरिका में कई दफा बेइज्जत होना पड़ा है ....पिछले दिनों मेरे पास एक एस एम एस आया जिसका मजमून कुछ इस तरह था कि हर मुसलमान आंतकी नही होता और आंतकी तो मुश्लिम होता ही नही ....भला वो लोग जो लाश को तक नही जलाते वो भला जिन्दा लोगों को क्या जलाएंगे ...लेकिन दिग्गी को कौन समझाए वे तो हर घटना दुर्घटना में बगवा रंग खोज लेते हैं ...वो तो खैर हुई कि अमेरिका और दूसरे देशों में आए चक्रवर्ती तूफान ज्वालामुखी फटने के लिए दिग्गी को भगवा हाथ क्यों नजर नही आया ...पहले हमारे देश में हर बात के लिए विदेशी हाथ नजर आता था कुछ वही बात अब दिग्गी के साथ हो रही है ...हद तो तब हो गई जब दिग्गी ने हेंमत करकरे की मुम्बई में हुई शहादत को दागदार करने की कोशिश की ...उन्होने यह आरोप लगाया कि अपनी मौत के चंद घंटे पहले करकरे ने उनसे बात करते हुए करकरे ने हिंदु अतिवादियों से अपनी जान को खतरा जताया था ...वो तो भला हो इस शहीद की पत्नी का जिन्होने इस आरोप को फौरन ही बकवास करार दिया था ...लेकिन फिर भी आदत जाती नही ...अब देश भर में घूम रहे दिग्गी यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि आडवाणी की रथयात्रा के बाद से देश में आंतकी वारदाते बढ़ी हैं...क्या कहें इस याददाश्त को ...सन सैंतालिस के बाद से सुलग रहा है काश्मीर और पंजाब का खालिस्तानी मूव्हमेंट भूल गए दिग्गी ...
एक तस्वीर इस आलेख के साथ लगी है ...जो बिना कुछ कहे हर बात कह देती है ...ओसामा को जी कहने वाले दिग्गी लानत भेजे जाने के बाद अपने बयान का ठीकरा मीडिया के सिर फोड़ते नजर आए ...दिग्गी का कहना था कि मीडिया उनकी बातों में छिपे व्यंग्य को नही समझ पाई ...पिछले दिनों एक शख्स को प्रीति जिंटा के शो में रिकार्ड के लिए मुँह में सैकड़ों स्ट्रॉ घुसेड़ते देखा था सोचता हूँ कि अगर दिग्गी उसके सामने आ जाएं तो बड़े से बड़ा रिकार्डधारी दिग्गी के मुँह के सामने नही ठहर पाएगा ...इस शख्स की आदत ही बन गई है कि जो भी अच्छा या बुरा इन दिनों हो रहा है उस पर इन्हे बयान देना ही देना है ...बुरे पर यह बचाव करेंगे और सारा ठीकरा हिंदु आंतकवादियों के सिर फोड़ेंगे औऱ सूरज पर थूकने की नई आदत पाल ली है ....हिन्दुस्तान हमेशा से पाकिस्तान पर आंतकी घोषित कराने के लिए मुहिम छेड़ता रहा है ...इस दबाव को हमारे ही नेताओं ने कम किया है विशेषकर दिग्गी राजा जैसों ने ...भारत की विदेशों में जितनी किरकिरी इन्होने की है उतनी शायद विदेशी दुश्मनों ने नही की ...क्या सिर्फ सुर्खियाँ बनना ही सबकुछ है...जिस अन्ना हजारे के नेतृत्व में सारा देश एकजुट हो गया था दिग्गी ने अपनी भद्द पिटवाने हजारे से आंदोलन का खर्चा और ब्यौरा माँग लिया ...हजारे ने भी फौरन अपनी बेवसाइट में पाई पाई का ब्यौरा दे दिया ...हार हार पर हार फिर क्यों ये ओछी बयानबाजी ...क्यों आंतकवादी चाहे जिस धर्म का हो उस पर जल्द कानूनी कार्रवाई हो ….और कानूनी कार्रवाई हो और सजा दी जाए ...और बेकार की बातें बयानबाजी न हो किसी भी तरह से राष्ट्रीय मुद्दों पर हम एक राष्ट्र की तरह नजर आएँ माकि एक पार्टी की तरह ...भले दिग्विजय और उसकी पार्टी को भगवा का भय दिखाकर दो चार वोट का फायदा क्यों न हो लेकिन इसका सीधा असर देश पर होता है और नुकसान होता है ....हमारी बातों का असर विश्व बिरादरी पर गलत न पड़े ...यह ख्याल रखना जरुरी है ..आजकल संचार साधनों के कारण दुनिया छोटी सी हो गई है ....एक छोटी छोटी सी बात कुछ सेंकड में ही इस कोने से दुसरे कोने तक फैल जाती है ...इसलिए देश से जुड़े मसले पर हमें एक रहना ही होगा ...हिंदु आंतकवाद इस शब्द के कारण देश दुनिया भर में बदनाम हो चुका है...भेड़िया आया के कारण आज हम ही कमजोर हुए हैं और हमें ही यह बात समझनी होगी ....और जितनी जल्दी हम ये बात समझ लें सही होगा ....
एक बात और ....जो बयानों का दौर चल रहा है वह फौरन बंद होना चाहिए ..भारत की सैन्य क्षमता पर हमें शंका कतई नही है लेकिन यह कहना कि भारत को पाकिस्तान पर सीधी कार्रवाई करके दाउद जैसों को पकड़ना चाहिए बेवकूफी होगी ...न इतना दम है हमारे नेताओं में ....न इतनी इच्छा शक्ति नाहि भारत और पाकिस्तान की सेहत के लिए सही होगा इस वक्त एक सीधा युद्ध...नाहि विश्वबिरादरी हमें ऐसा करने देगी क्योंकि भारत भारत है अमेरिका अमेरिका ....आप सिर्फ भावनाएँ भड़का कर अपना उल्लू सीधा कर सकते हैं लेकिन इसका नुकसान भारत को ही होगा ..... रामदेव भ्रष्टाचार की ही बात करें योग की बात करें ...विदेश मामलों पर टिप्पणी न दें ...यह अभी सिर्फ मृगमारीचिका ही है कि हम रातों रात हमला कर के दाउद जैसों को पकड़ लेंगे ...और यदि पकड़ भी लिया तो फिर उन्हे अजमल कसाब और अफजल गुरु की ही तरह से शोपीस बनाकर रखना है तो क्या फायदा .

No comments:

Post a Comment