Saturday, 14 May 2011

पी एम पद की जुगत ..


पी एम पद की जुगत ...

सारे देश में सिर्फ एक ही नेता ऐसा है जो सबके सामने खुलेआम यह कह सकता है कि वह प्रधानमंत्री बनना चाहता है ...लालू प्रसाद यादव के अतिरिक्त शायद ही कभी किसी ने यह स्वीकारोक्ति की हो कि वह पी एम के पद की दौड़ में है ...आमतौर पर सभी यह कह कर अपनी महात्वाकाँक्षा दबा जाते हैं कि आलाकमान जो भी जिम्मेदारी सौंपेगा उसे स्वीकार करेंगे...भले लोग अपनो श्रीमुख से यह बात स्वीकार न करें लेकिन यह सच है कि हर नेता उसी तरह प्रधानमंत्री बनना चाहता है जिस प्रकार से हर फिल्म देखने वाला हीरो बनने की तमन्ना पाले रहता है ....भले लोग अपनी जुबां से इस बात का इकरार न करें लेकिन यह भी सच है कि उनके हाव भाव से लोगों को उनके इरादों का अंदाजा हो जाता है ...इन दिनों कुछ ऐसा ही बर्ताव है मध्यप्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री का ...जबसे काँग्रेस के सर्वेसर्वा राहुल गाँधी ने एक आम सभा में यह कहा कि वो प्रधानमंत्री पद की दौड़ में नही है इनके ख्वाबों को पर लग गए हैं ...वैसे तो राहुल गाँधी शुरु से ही यह बात दोहराते रहे हैं लेकिन इस बार उन्होने यह भी जोड़ दिया कि अभी उनकी उम्र और अनुभव इस पद के लायक नही है वैसे भी पार्टी में मनमोहन सिंह और दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद हैं ....इस बयान के बाद से दिग्विजय सिंह की राजनीति में अचानक सक्रियता बढ़ गई है ...मसला चाहे कोई भी हो वो बयान जारी कर ही दोते हैं ...दिग्गी राजा की कोशिश रहती है कि किसी तरह से अपने बयान के जरिए वो मुसीबत में पड़ी सरकार और पार्टी को भंवर से बाहर निकाल सकें...चाहे रामदेव के तीर हों या फिर अन्ना का अनशन दिग्विजय सिंह हर मौके पर बयान देने के लिए उपलब्ध नजर आए...और ते और लोदेन की मौत पर भी उनका यह बयान सामने आया कि किसी का भी अंतिम संस्कार पूरे विधि विधान से किया जाना चाहिए ...यह अलग बात है कि उनके बयानों के कारण भी पार्टी और सरकार को कई दफा नीचा देखना पड़ा लेकिन इससे दिग्गी राजा की सेहत पर कोई खास असर नही पड़ा. दिग्विजय सिंह बोलने वालों की परवाह किए बगैर अपनी राह पर बढ़ चले हैं ...राह प्रधानमंत्री की कुर्सी की ...वो जानते हैं कि बहुत कठिन है डगर पनघट की ....लेकिन कोशिश में हर्ज ही क्या है ...

अर्जुन सिंह के निधन और नारायण दत्त तिवारी के पैत्रृक विवाद में फंसे होने के बाद से दिग्गी के लिए राहे कुछ ज्यादा ही खुल गई हैं ....काँग्रेस के केन्द्र में सोनिया राहुल के बाद एक शून्य ही नजर आता है जिसे भरने के लिए दिग्गी राजा की सक्रियता देखी जा सकती है ...दिग्गी जो खुले आम यह कह चुके हों कि चुनाव विकासल के बजाए सामाजिक गणित के आधार पर जीते जाते हैं इस फन मे खासे माहिर हैं ...मध्यप्रदेश में बेहिसाब छँटनी और विकास के प्रति नकारात्मक रवैये के बावजूद वो पूरे दस साल तक प्रदेश की कमान सँभाले रहे ...दिग्गी को राजनीति की गोटिंया बिठाने में खासी महारत हासिल है जिस अनुभव और योग्यता का लाभ वो अपने इस ख्वाब के साकार करने में उठाना चाहते हैं ....पिछले दिनों नोयडा के पास हुए भूमि अधिग्रहण के विरोध में राहुल के धरने के वक्त दिग्गी राहुल के हमकदम नजर आए...राहुल के हर कदम उठाने में दिग्गी की खासी भूमिका रही...वे राहुल बाबा की परछाई की तरह नजर आ रहे थे ...राहुल का ग्लैमर और दिग्गी की राजनीति का गठजोड़ उस वक्त नजर आया जब पुलिस का अनुरोध मान कर पहले तो राहुल बाबा गाँव छोड़ने तैयार हो गए ...जब यह काफिला रास्ते में था और लग यही रहा था कि इस नाटक का पटाक्षेप जल्द ही हो जाएगा ...इस बीच उत्तरप्रदेश प्रशासन के प्रवक्ता शंशाक शेखर सामने आकर अपनी सरकार की पीठ थपथपा रहे थे इस बीच रास्ते में अचानक राहुल बाबा ने अपनी गाड़ी रुकवाई और पुलिस के अधिकारियों से अपनी गिरफ्तारी के कागज माँगने लगे ...काँग्रेस के इस अमूल बेबी को भला राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों की समझ कहाँ ....जाहिर है राहुल को यह गुरु ज्ञान सिर्फ दिग्गी राजा ही दे सकते हैं क्योंकि प्रशासन की जितनी समझ उन्हे है उतनी न राहुल को नाहि उनके आसपास की मंडली को ...मायावती को नाको चना चबा देने का यह आइडिया सिर्फ और सिर्फ दिग्विजय ही दे सकते थे ...

दिग्विजय सिंह ने अपने लिए जो गणित सोचा है वह सहज समझा जा सकता है ....दिग्विजय सिंह को मालूम है कि अगर अगले् चुनावों में काँग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलता है तो निश्चित है कि राहुल ही अगले प्रधानमंत्री बंनेगे और यदि वर्तमान सरकार की तरह साधारण बहुमत मिलता है तो फिर मनमोहनसिंह का ही नम्बर आएगा ....लेकिन अगर गणित जोड़तोड़ वाला रहा या मजबूत के बजाए मजबूर सरकार बनी तो फिर दिग्गी के भाग जाग सकते हैं ....इसके लिए वो सिर्फ इतनी कोशिश कर रहे हैं कि काँग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिले ...लेकिन बहुमत के लिए उन्हे तरसना पड़े ...इसलिए इन दिनों वो मुसलमानों को लुबाने की कोई कोशिश नही छोड़ रहे हैं चाहे वह संघ को गरियाने का मामला हो या फिर बाटला हाउस में फर्जी मुठभेड़ बताने की बात हो या फिर आंतकवाद के लिए प्रभावित गाँव में जाकर क्लीन चिट देने का मामला हो ...वे मुसलमानों को अपने साथ जोड़कर सोशल इंजीनियरिंग को अंजाम दे रहे हैं .....हिंदु आंतकवाद शब्द को प्रचारित करने में दिग्विजय सिंह का बड़ा योगदान है ...जाहिर है यह सारा जुगत आगामी चुनावों के लिए ही भिड़ाया जा रहा है ...

मध्यप्रदेश की बात करें तो यह हमेशा से काँग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है ... लेकिन दिग्विजय के कुशासन के कारण आज प्रदेश से काँग्रेस का नामोनिशान मिट गया है ...दस साल तक सत्ता से दूर रहने के बाद अब दिग्विजय ने प्रदे्श में अपनी गोटियाँ बिठा दी है ....दिग्गी ने न सिर्फ पार्टी अध्यक्ष अपनी पंसद का बनवाया है बल्कि नेता प्रतिपक्ष भी उनके ही खेमे का है ....जाहिर है अगले चुनाव में दिग्गी गुट का बोलबाला रहेगा और चुनाव नतीजे आने के बाद दिग्गी अपने् हिसाब से जोड़ घटाना मोलभाव कर सकेंगे...देखना यह है कि क्या होता है इस जोड़ घटाने का अंजाम फिलहाल तो अगले चुनाव तक तो अंगूर खट्टे हैं दिग्गी बाबा

Monday, 9 May 2011

किसलिए चाहिए आंतकी ...


किसलिए चाहिए आंतकी ...
भारत सरकार ने पाकिस्तान पर बन रहे दबाव को भुनाने के लिए पच...्चीस आंतकवादियों को एक बार फिर भारत के हवाले करने की माँग कर दी है ...सवाल यह है कि आखिर हमें ये आंतकी किसलिए चाहिए ...क्या उन्हे भारत दर्शन कराना है जिस तरह से अबू सलेम को हम शहर दर शहर घुमा रहे हैं ...इन्क्रेडिबल इंडिया के विज्ञापन के लिए आमिर खान के बजाए अबू सलेम को बनाना चाहिए ...उसे चाहे जब नवाबों के शहर हैदराबाद से भोपाल की यात्रा पर देखा जा सकता है ...मेरे ख्याल से भारत के प्रधानमंत्री को भी इतनी तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था नही दी गई होगी जितनी इस आंतकवादी को दी गई है...न सिर्फ सिक्युरिटी बल्कि इज्जत भी दी जाती है जब भोपाल आता है यह आंतकी तो न सिर्फ पुलिस के बल्कि दूसरे जिनमें हमारे मीडिया के साथी भी शामिल हैं भाई भाई कह कर एक अदद बाइट के लिए रिरियाते नजर आते हैं ...सिर्फ अबू क्यों एक और जी हैं जो मुम्बई के आंतकी हमले में धरे गए थे ...अजमल कामिल कसाब जिसने महज बीस हजार रुपयों के लिए सैकड़ों हिंदुस्तानियों के कत्ल की बात स्वीकार की उसे आज इतनी कड़ी सुरक्षा में रखा गया है कि शायद वह मुहावरा सच हो जाता है कि पंरिदा भी उसके पास पर भी नही मार सकता ...सदी के महानायक के खिताब से नवाजे गए अमिताभ बच्चन ने कसाब के लिए अपने ब्लाग में लिखा था कि भारत में वही इकलौता शख्स है जो सबसे सुरक्षित है ...ये अलग बात है कि फिर करोड़ों हिन्दुस्तानियों के दिल की बात को आवाज देने वाला यह नायक अपनी बात से यह कहते हुए पलट गया कि उसने किसी पाठक के मैसेज को ही अपने ब्लॉग पर लिखा था ...खैर महानायक तो पलट गए लेकिन काश हमारी सरकारें इस मैसेज को समझ पाती और जान पाती कि कितना गमो गुस्से का गुबार भरा है ...लेकिन शायद लोकतंत्र में अटल जी की बात सच साबित होती कि लोकतंत्र में सिर के भीतर क्या है यह नही देखा बल्कि सिर्फ सिर गिने जाते हैं ...दरअसल सरकारों की आँखों में लगे चश्में का रंग अपने फायदे और नुकसान के हिसाब से बदलते जाते हैं ...और इसी के साथ बदलती जाती है नीतियाँ और बयान ...अब हमारे हर मुद्दे पर बयान देने के लिए प्रसिद्ध दिग्विजय सिंह को ही लें ...दुनिया के सबसे खतरनाक आंतकवादी के खात्में के दिन उन्होने बयान दिया कि लादेन की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार कायदे और धार्मिक रीतिरिवाजों के हिसाब से किया जाना था ...सवाल यह है कि इस आंतकी के मारे जाने के बाद जब सारी दुनिया जश्न मना रहा थी क्या जरुरत थी भारत के एक नेता की ओर से इस तरह के संदेश जाने की ...आखिर क्या दिखाना चाहते हैं दिग्गी राजा जबकि हमारी सरकारें अंकल सैंम की दी हुई लॉलीपॉप चूसने की आदत बना चुके हैं ...इसका असर भी हुआ और सोनिया जी ने दिग्विजय सिंह को बुलाकर कड़वी डाँट भी पिलाई लेकिन कहते हैं कि पुरानी आदत भला कहाँ इतनी आसानी से पीछा छोड़ती हैं ...कई मुहावरे इस संबध में प्रचलित हैं जो आपको याद आ गए होंगे इसलिए फिलहाल उनका उपयोग नही कर रहा ...अगले ही दिग्विजय सिंह का एक नया रुप देखने को मिला ...अपने नए बयान में उन्होने इस आंतकी को ओसामा जी कह कर सम्बोधित किया ...सवाल यह है कि सिर्फ सोनिया और राहुल गाँधी को जी सम्बोधित करने वाली काँग्रेस की संस्कृति में ओसामा के लिए यह सम्बोधन क्यों निकल रहा है ...ओसामा के आदर से अंतिम संस्कार की बात समझी भी जा सकती थी क्योंकि भारत की संस्कृति में किसी की मौत के साथ ही उसके सारे पाप धुल जाते हैं ...सारी दुश्मनी का खात्मा हो जाता है लेकिन जिसे हर कोई कोस रहा हो ...अगले ही रोज जिस आंतकवादी के विडियो गेम मार्केट में आ गई हो उसके लिए भारत का आदर सूचक जी कुछ समझ नही आया इसके अलावा दिग्गी राजा ने मुम्बई के मारे गए आंतकियों के लिए आताताई शब्द की बजाए लोग शब्द का प्रयोग किया...आखिर क्यों ये हमदर्दी ...जल्द ही बात समीक्षकों की समझ में आ गई कि उत्तरप्रदेश में हो रहे चुनावों के कारण यह अल्पसंख्यक कार्ड खेला जा रहा है ...दरअसल मध्यप्रदेश में पार्टी की करारी हार के बावजूद दिग्गी राजा को आज तक ये समझ नही आया है कि अब चुनाव सिर्फ विकास से जीते जा सकते हैं अब सिर्फ विकास कार्ड चलता है ....सवाल यह है कि किस बूते पर वे मुसलमानों को अपनी ओर आकर्शित करने का मंसूबा पाल रहे हैं...लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे दिग्गी क तब झटका लगा था जब उनका साम.जिक गणित फैल हो गया था ....इसके बाद गहरे सदमें में चले गए दिग्गी राजा ने दस साल तक राजनीति से दूर रहने की घोषणा कर दी थी लेकिन कुर्सी का लोभ जो न कराए वो कम ...जल्द ही दिग्गी राजा फिर बयानों के तीर चलाते नजर आने लगे लेकिन वो धार न रही उधर पार्टी में उनके अपने ही खाई खोद रहे थे इसलिए जल्द ही दिग्विजय सिंह नें केन्द्र की जुगत बिठाई और दिल्ली जा बैठे ..दस जनपथ से नजदीकी बनाने के लिए दिग्गी ने नया रास्ता चुन लिया है ...सीधा भगवा परिवार पर आरोप ...इस सनक की अति तो यह है कि उन्हे हर आंतकी वारदात में अब भगवा परिवार का हाथ नजर आता है ...ठीक अमेरिकन की तरह जिन्हे हर मुसलमान आंतकी नजर आता है इसके चलते महान डॉक्टर कलाम और शाहरुख खान जैसे महानुभावों को अमेरिका में कई दफा बेइज्जत होना पड़ा है ....पिछले दिनों मेरे पास एक एस एम एस आया जिसका मजमून कुछ इस तरह था कि हर मुसलमान आंतकी नही होता और आंतकी तो मुश्लिम होता ही नही ....भला वो लोग जो लाश को तक नही जलाते वो भला जिन्दा लोगों को क्या जलाएंगे ...लेकिन दिग्गी को कौन समझाए वे तो हर घटना दुर्घटना में बगवा रंग खोज लेते हैं ...वो तो खैर हुई कि अमेरिका और दूसरे देशों में आए चक्रवर्ती तूफान ज्वालामुखी फटने के लिए दिग्गी को भगवा हाथ क्यों नजर नही आया ...पहले हमारे देश में हर बात के लिए विदेशी हाथ नजर आता था कुछ वही बात अब दिग्गी के साथ हो रही है ...हद तो तब हो गई जब दिग्गी ने हेंमत करकरे की मुम्बई में हुई शहादत को दागदार करने की कोशिश की ...उन्होने यह आरोप लगाया कि अपनी मौत के चंद घंटे पहले करकरे ने उनसे बात करते हुए करकरे ने हिंदु अतिवादियों से अपनी जान को खतरा जताया था ...वो तो भला हो इस शहीद की पत्नी का जिन्होने इस आरोप को फौरन ही बकवास करार दिया था ...लेकिन फिर भी आदत जाती नही ...अब देश भर में घूम रहे दिग्गी यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि आडवाणी की रथयात्रा के बाद से देश में आंतकी वारदाते बढ़ी हैं...क्या कहें इस याददाश्त को ...सन सैंतालिस के बाद से सुलग रहा है काश्मीर और पंजाब का खालिस्तानी मूव्हमेंट भूल गए दिग्गी ...
एक तस्वीर इस आलेख के साथ लगी है ...जो बिना कुछ कहे हर बात कह देती है ...ओसामा को जी कहने वाले दिग्गी लानत भेजे जाने के बाद अपने बयान का ठीकरा मीडिया के सिर फोड़ते नजर आए ...दिग्गी का कहना था कि मीडिया उनकी बातों में छिपे व्यंग्य को नही समझ पाई ...पिछले दिनों एक शख्स को प्रीति जिंटा के शो में रिकार्ड के लिए मुँह में सैकड़ों स्ट्रॉ घुसेड़ते देखा था सोचता हूँ कि अगर दिग्गी उसके सामने आ जाएं तो बड़े से बड़ा रिकार्डधारी दिग्गी के मुँह के सामने नही ठहर पाएगा ...इस शख्स की आदत ही बन गई है कि जो भी अच्छा या बुरा इन दिनों हो रहा है उस पर इन्हे बयान देना ही देना है ...बुरे पर यह बचाव करेंगे और सारा ठीकरा हिंदु आंतकवादियों के सिर फोड़ेंगे औऱ सूरज पर थूकने की नई आदत पाल ली है ....हिन्दुस्तान हमेशा से पाकिस्तान पर आंतकी घोषित कराने के लिए मुहिम छेड़ता रहा है ...इस दबाव को हमारे ही नेताओं ने कम किया है विशेषकर दिग्गी राजा जैसों ने ...भारत की विदेशों में जितनी किरकिरी इन्होने की है उतनी शायद विदेशी दुश्मनों ने नही की ...क्या सिर्फ सुर्खियाँ बनना ही सबकुछ है...जिस अन्ना हजारे के नेतृत्व में सारा देश एकजुट हो गया था दिग्गी ने अपनी भद्द पिटवाने हजारे से आंदोलन का खर्चा और ब्यौरा माँग लिया ...हजारे ने भी फौरन अपनी बेवसाइट में पाई पाई का ब्यौरा दे दिया ...हार हार पर हार फिर क्यों ये ओछी बयानबाजी ...क्यों आंतकवादी चाहे जिस धर्म का हो उस पर जल्द कानूनी कार्रवाई हो ….और कानूनी कार्रवाई हो और सजा दी जाए ...और बेकार की बातें बयानबाजी न हो किसी भी तरह से राष्ट्रीय मुद्दों पर हम एक राष्ट्र की तरह नजर आएँ माकि एक पार्टी की तरह ...भले दिग्विजय और उसकी पार्टी को भगवा का भय दिखाकर दो चार वोट का फायदा क्यों न हो लेकिन इसका सीधा असर देश पर होता है और नुकसान होता है ....हमारी बातों का असर विश्व बिरादरी पर गलत न पड़े ...यह ख्याल रखना जरुरी है ..आजकल संचार साधनों के कारण दुनिया छोटी सी हो गई है ....एक छोटी छोटी सी बात कुछ सेंकड में ही इस कोने से दुसरे कोने तक फैल जाती है ...इसलिए देश से जुड़े मसले पर हमें एक रहना ही होगा ...हिंदु आंतकवाद इस शब्द के कारण देश दुनिया भर में बदनाम हो चुका है...भेड़िया आया के कारण आज हम ही कमजोर हुए हैं और हमें ही यह बात समझनी होगी ....और जितनी जल्दी हम ये बात समझ लें सही होगा ....
एक बात और ....जो बयानों का दौर चल रहा है वह फौरन बंद होना चाहिए ..भारत की सैन्य क्षमता पर हमें शंका कतई नही है लेकिन यह कहना कि भारत को पाकिस्तान पर सीधी कार्रवाई करके दाउद जैसों को पकड़ना चाहिए बेवकूफी होगी ...न इतना दम है हमारे नेताओं में ....न इतनी इच्छा शक्ति नाहि भारत और पाकिस्तान की सेहत के लिए सही होगा इस वक्त एक सीधा युद्ध...नाहि विश्वबिरादरी हमें ऐसा करने देगी क्योंकि भारत भारत है अमेरिका अमेरिका ....आप सिर्फ भावनाएँ भड़का कर अपना उल्लू सीधा कर सकते हैं लेकिन इसका नुकसान भारत को ही होगा ..... रामदेव भ्रष्टाचार की ही बात करें योग की बात करें ...विदेश मामलों पर टिप्पणी न दें ...यह अभी सिर्फ मृगमारीचिका ही है कि हम रातों रात हमला कर के दाउद जैसों को पकड़ लेंगे ...और यदि पकड़ भी लिया तो फिर उन्हे अजमल कसाब और अफजल गुरु की ही तरह से शोपीस बनाकर रखना है तो क्या फायदा .

Tuesday, 3 May 2011

बड़ा मुंशिफ है अमेरिका .....उसे अल्लाह खुश रखे.....


लादेन मारा गया हर ओर यही शोर...हर खबरिया चैनल विज्ञापन रोक रोक कर बस यही चीख रहा ...पाकिस्तानी चैनलों से चोरी किए फुटेज लेकर बस यही खबर ...कुछ स्वनाम धन्य विशेषज्ञ बैठ गए बतियाने ....प्राइम टाइम पर आने वाले और सिर्फ अपने नाम की खातिर बिकने वाले एंकर भी चीखते चिल्लाते नजर आए लेकिन सच कहूँ तो किसी ने बी सही विश्लेषण नही किया ...बस शोर शोर ...क्या किसी ने यह समझने की कोशिश की कि आखिर कैसे आखिर अपने आधा सैकड़ा भाइ बहनों के बीच सत्रहवें नम्बर का ओसामा ओसामा बिन लोदेन बन गया ..एक ऐसा नाम जो सारी दुनिया को थर्रा देने का माद्दा रखता था ....दरअसल अमेरिका जो अपने इस रक्तबीज भस्मासुर को मारकर खुशी से फूला नही समा रहा है ...लोग ये क्यों भूल गए कि इस भस्मासुर को अभयदान और वरदान देने वाला कोई और नही सिर्फ अमेरिका था ...आंतक बिन लादेन ये हैडलाइन है अखबार की लेकिन क्या किसी ने ये समझाने की कोशिश की कि आखिर कैसे इस मकाम पर पहुँचा यह शख्स कि सबसे ताकतवर कहे समझे जाने वाले देश का ऱाष्ट्रपति खुद मजबूर हो गया घोषणा करने को ...दरअसल क्या कोई यह सवाल क्यों नही करता कि अमेरिका सिर्फ उन्ही तानाशाहों को पटकनी क्यों देता है जिनसे उसके आर्थिक हित सध सकते हैं सद्दाम के पास तेल का अकूत भंडार था सो उसे बिल से निकाल कर मार डाला किसी ने ये क्यों नही पूछा कि कहाँ गए वे रासायनिक और जैविक हथियार जो सद्दाम ने बनाए थे और जिनका हौव्वा खड़ा कर अंकल सैम ने इराक को तबाह कर दिया ....ईरान के पास तेल है तो उस पर भी आका सैम की तिरछी नजर है ...मिस्त्र में जब जनता तहरीर चौक पर हजारों की तादात में आम लोगों का जमावड़ा लगता है तो अंकल सैम और उनके छर्रे क्यों नही दौड़ते वही लीबिया में तानाशाही के अंत के नाम पर नो फ्लाइंग जोन बनाकर अपने विमान दौड़ाए जाते हैं.... लोग लुगाई बच्चे और बूढ़ें न जाने कितने लोग र रोज मर रहे हैं लेकिन कोई मानवाधिकार कार्यकर्ता बोलने को खाली नही और वहीं विनायक सेन के लिए दुनिया भर से नुमाँइदे जेल के बाहर भीड़ बढ़ाने को चले आते हैं ...मुश्लिम बहुल राष्ट्र इस्त्राइल का गला घोंटकर वहाँ यहूदी बसा दिए जाते हैं ...देश के टुकड़े होते हैं तब तो कोई कुछ नही बोलता ...बस सब चुपचाप बैठे रहते हैं समरथ को नही दोष गुँसाई की तर्ज पर ...और एक यही मंजर था जिसने आसामा को बनाया आंतकी ....भारत के नेताओं की तो बात करना ही बेकार है ...दिग्गी इतना कहते हैं कि ओसामा का अंतिम संस्कार इज्जत से करना था वो भी सिर्फ इसलिए कि भारत के मुसलमान उनकी पार्टी को वोट दें ...बाकी न तो कोई सद्दाम की मौत पर कुछ बोलता है नाहि रुस के टुकड़े होने पर ...विदेश राजनीति में यही दो देश थे जिन्होने हर वक्त में भारत का साथ दिया था ...लेकिन हम वही गुटनिरपेक्षता का झुनझुना थामें दिल को बहलाते रहे ...मतलब साधने के लिए सैम अंकल की दी हुई लॉलीपाप चूसने लगे बिना बुजुर्गों की चेतावनी को देखे कि कि किसी अजनबी के हाथ से दी हुई चीज नही खानी चाहिए ....हम बस बिछना जानते हैं गोरांग प्रभुओं के आगे ....किसी ने यह क्यों नही पूछा कि ओसामा को मारने के बाद ठिकाने लगाने की इतनी जल्दी क्या थी कि उसकी तस्वीर तक जारी नही की गई ...बीजेपी ने कहा कि भारत मुम्बई के आरोपियों के लिए ऐसा ही ऑपरेशन चलाए ...सवाल यह है कि अटलराज में प्रतिसाद करेंगे की बात कहने के बाद कारगिल के वीर और दूसरे लौहपुरुष ठंडे क्यों पड़ गए ...आपकी भी तो संसद की इज्जत लुटी थी ..सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं ...पक्ष भी विपक्ष भी ...क्या कहें ...दिन भर एक तस्वीर चैनलों पर दिखाई गई जो ओसामा की बहुत पहले की तस्वीर दिख रही थी रात में पता चला कि तस्वीर फर्जी है ...हमारे यहाँ तो एक चिंदी चोर पकड़ा जाता है तो उसे लेकर पुलिस शान से ऐसे फोटो खिंचाती है जैसे पुराने जमाने में राजा महाराजा मरे शेर के साथ कंधे पर बंदूक टाँगकर खिंचाते थे ...लेकिन दुनिया के ताकतवर थानेदार ने आदमखोर हो चुके शेर की तस्वीर तक जारी न की नाहि अब तक उसके बीवी बच्चों को सामने किया है ...कोई क्यों नही पूछता इस थानेदार से कि अमेरिका में बन रही उन डाक्यूमेंट्री पर सरकार चुप क्यों है जिसमें कहा गया था कि ट्विन टॉवर का हमला अमेरिका ने खुद करवाया था ...सवाल यह भी है कि क्या एक ऐसे बूढ़े को मारकर जिसका चाहे जब डायलिसिस होता रहता था को सोते में मारकर अमेरिका ने कौन सा तीर मार लिया ...उस विचारधारा का क्या ...जो लादेन के बाद भी जिन्दा है ...क्या होगा उस गुस्से का जो लोगों के दिल में पनप रहा है विशेषकर दुनिया भर के मुसलमानों में ....क्यों हथियारों की नुमाइश कर रहा है अमेरिका ...भारत ने विमान सौदे ठुकरा दिए देखें क्या होता है दुनिया के इस लालची का इंतकाम ...

मेरा इस आलेख से यह कतई मतलब न निकाले कि आंतक का महिमा मंडन मेरा उद्देश्य है लेकिन कोई दुनिया के इस सबसे बड़े आंतकी से कोई यह क्यों नही पूछता कि बारत की संसद ,काश्मीर मुम्बई .बनारस............में हजारों बेगुनाह मारे जाते हैं हजारों माँगे सूनी हो जाती है लाखों बच्चे अनाथ हो जाते हैं ...सर से उजड़ जाती है छत तब क्योंसोया रहता है यह गुंडा यह थानेदार ...क्या काले लोगों पर अत्याचार का हक है कोई भी कभी भी कहीँ भी कुछ भी कर दे और अमेरिका में सिर्फ एक शक पर ही नेस्तानबूद कर दिया जाता है सारा की सारा देश ..कौन डालेगा इस बेकाबू साँड की नाक में नकेल ..या सही है कवि की वो पंक्तियाँ ....

बड़ा मुंशिफ है अमेरिका

उसे अल्लाह खुश रखे

न जौमे शेख वो सबको बराबर प्यार देता है

किसी को हमला करने को देता है मिसाइल

तो किसी को बचने को राडार देता है ....

तरस आता है पाकिस्तान पर उसने भी वही गलती की जो भारत के धार्मिक अतिवादियों ने की थी ...जिस बावरी मस्जिद के नाम पर दो से दो सौ तक पहुँचे उसे ही नेस्तानबूद कर के शीर्ष से शून्य तक भी पहुँच गए अब कौन देगा सहायता ...लोदेन के नाम पर ही रोजी रोटी चल रही थी पाकिस्तान की अब कौन पालेगा पेट ...हाय पाकिस्तान क्या किया