
लादेन मारा गया हर ओर यही शोर...हर खबरिया चैनल विज्ञापन रोक रोक कर बस यही चीख रहा ...पाकिस्तानी चैनलों से चोरी किए फुटेज लेकर बस यही खबर ...कुछ स्वनाम धन्य विशेषज्ञ बैठ गए बतियाने ....प्राइम टाइम पर आने वाले और सिर्फ अपने नाम की खातिर बिकने वाले एंकर भी चीखते चिल्लाते नजर आए लेकिन सच कहूँ तो किसी ने बी सही विश्लेषण नही किया ...बस शोर शोर ...क्या किसी ने यह समझने की कोशिश की कि आखिर कैसे आखिर अपने आधा सैकड़ा भाइ बहनों के बीच सत्रहवें नम्बर का ओसामा ओसामा बिन लोदेन बन गया ..एक ऐसा नाम जो सारी दुनिया को थर्रा देने का माद्दा रखता था ....दरअसल अमेरिका जो अपने इस रक्तबीज भस्मासुर को मारकर खुशी से फूला नही समा रहा है ...लोग ये क्यों भूल गए कि इस भस्मासुर को अभयदान और वरदान देने वाला कोई और नही सिर्फ अमेरिका था ...आंतक बिन लादेन ये हैडलाइन है अखबार की लेकिन क्या किसी ने ये समझाने की कोशिश की कि आखिर कैसे इस मकाम पर पहुँचा यह शख्स कि सबसे ताकतवर कहे समझे जाने वाले देश का ऱाष्ट्रपति खुद मजबूर हो गया घोषणा करने को ...दरअसल क्या कोई यह सवाल क्यों नही करता कि अमेरिका सिर्फ उन्ही तानाशाहों को पटकनी क्यों देता है जिनसे उसके आर्थिक हित सध सकते हैं सद्दाम के पास तेल का अकूत भंडार था सो उसे बिल से निकाल कर मार डाला किसी ने ये क्यों नही पूछा कि कहाँ गए वे रासायनिक और जैविक हथियार जो सद्दाम ने बनाए थे और जिनका हौव्वा खड़ा कर अंकल सैम ने इराक को तबाह कर दिया ....ईरान के पास तेल है तो उस पर भी आका सैम की तिरछी नजर है ...मिस्त्र में जब जनता तहरीर चौक पर हजारों की तादात में आम लोगों का जमावड़ा लगता है तो अंकल सैम और उनके छर्रे क्यों नही दौड़ते वही लीबिया में तानाशाही के अंत के नाम पर नो फ्लाइंग जोन बनाकर अपने विमान दौड़ाए जाते हैं.... लोग लुगाई बच्चे और बूढ़ें न जाने कितने लोग र रोज मर रहे हैं लेकिन कोई मानवाधिकार कार्यकर्ता बोलने को खाली नही और वहीं विनायक सेन के लिए दुनिया भर से नुमाँइदे जेल के बाहर भीड़ बढ़ाने को चले आते हैं ...मुश्लिम बहुल राष्ट्र इस्त्राइल का गला घोंटकर वहाँ यहूदी बसा दिए जाते हैं ...देश के टुकड़े होते हैं तब तो कोई कुछ नही बोलता ...बस सब चुपचाप बैठे रहते हैं समरथ को नही दोष गुँसाई की तर्ज पर ...और एक यही मंजर था जिसने आसामा को बनाया आंतकी ....भारत के नेताओं की तो बात करना ही बेकार है ...दिग्गी इतना कहते हैं कि ओसामा का अंतिम संस्कार इज्जत से करना था वो भी सिर्फ इसलिए कि भारत के मुसलमान उनकी पार्टी को वोट दें ...बाकी न तो कोई सद्दाम की मौत पर कुछ बोलता है नाहि रुस के टुकड़े होने पर ...विदेश राजनीति में यही दो देश थे जिन्होने हर वक्त में भारत का साथ दिया था ...लेकिन हम वही गुटनिरपेक्षता का झुनझुना थामें दिल को बहलाते रहे ...मतलब साधने के लिए सैम अंकल की दी हुई लॉलीपाप चूसने लगे बिना बुजुर्गों की चेतावनी को देखे कि कि किसी अजनबी के हाथ से दी हुई चीज नही खानी चाहिए ....हम बस बिछना जानते हैं गोरांग प्रभुओं के आगे ....किसी ने यह क्यों नही पूछा कि ओसामा को मारने के बाद ठिकाने लगाने की इतनी जल्दी क्या थी कि उसकी तस्वीर तक जारी नही की गई ...बीजेपी ने कहा कि भारत मुम्बई के आरोपियों के लिए ऐसा ही ऑपरेशन चलाए ...सवाल यह है कि अटलराज में प्रतिसाद करेंगे की बात कहने के बाद कारगिल के वीर और दूसरे लौहपुरुष ठंडे क्यों पड़ गए ...आपकी भी तो संसद की इज्जत लुटी थी ..सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं ...पक्ष भी विपक्ष भी ...क्या कहें ...दिन भर एक तस्वीर चैनलों पर दिखाई गई जो ओसामा की बहुत पहले की तस्वीर दिख रही थी रात में पता चला कि तस्वीर फर्जी है ...हमारे यहाँ तो एक चिंदी चोर पकड़ा जाता है तो उसे लेकर पुलिस शान से ऐसे फोटो खिंचाती है जैसे पुराने जमाने में राजा महाराजा मरे शेर के साथ कंधे पर बंदूक टाँगकर खिंचाते थे ...लेकिन दुनिया के ताकतवर थानेदार ने आदमखोर हो चुके शेर की तस्वीर तक जारी न की नाहि अब तक उसके बीवी बच्चों को सामने किया है ...कोई क्यों नही पूछता इस थानेदार से कि अमेरिका में बन रही उन डाक्यूमेंट्री पर सरकार चुप क्यों है जिसमें कहा गया था कि ट्विन टॉवर का हमला अमेरिका ने खुद करवाया था ...सवाल यह भी है कि क्या एक ऐसे बूढ़े को मारकर जिसका चाहे जब डायलिसिस होता रहता था को सोते में मारकर अमेरिका ने कौन सा तीर मार लिया ...उस विचारधारा का क्या ...जो लादेन के बाद भी जिन्दा है ...क्या होगा उस गुस्से का जो लोगों के दिल में पनप रहा है विशेषकर दुनिया भर के मुसलमानों में ....क्यों हथियारों की नुमाइश कर रहा है अमेरिका ...भारत ने विमान सौदे ठुकरा दिए देखें क्या होता है दुनिया के इस लालची का इंतकाम ...
मेरा इस आलेख से यह कतई मतलब न निकाले कि आंतक का महिमा मंडन मेरा उद्देश्य है लेकिन कोई दुनिया के इस सबसे बड़े आंतकी से कोई यह क्यों नही पूछता कि बारत की संसद ,काश्मीर मुम्बई .बनारस............में हजारों बेगुनाह मारे जाते हैं हजारों माँगे सूनी हो जाती है लाखों बच्चे अनाथ हो जाते हैं ...सर से उजड़ जाती है छत तब क्योंसोया रहता है यह गुंडा यह थानेदार ...क्या काले लोगों पर अत्याचार का हक है कोई भी कभी भी कहीँ भी कुछ भी कर दे और अमेरिका में सिर्फ एक शक पर ही नेस्तानबूद कर दिया जाता है सारा की सारा देश ..कौन डालेगा इस बेकाबू साँड की नाक में नकेल ..या सही है कवि की वो पंक्तियाँ ....
बड़ा मुंशिफ है अमेरिका
उसे अल्लाह खुश रखे
न जौमे शेख वो सबको बराबर प्यार देता है
किसी को हमला करने को देता है मिसाइल
तो किसी को बचने को राडार देता है ....
तरस आता है पाकिस्तान पर उसने भी वही गलती की जो भारत के धार्मिक अतिवादियों ने की थी ...जिस बावरी मस्जिद के नाम पर दो से दो सौ तक पहुँचे उसे ही नेस्तानबूद कर के शीर्ष से शून्य तक भी पहुँच गए अब कौन देगा सहायता ...लोदेन के नाम पर ही रोजी रोटी चल रही थी पाकिस्तान की अब कौन पालेगा पेट ...हाय पाकिस्तान क्या किया

सही विश्लेषण.
ReplyDeleteपंकज.